Swami Vivekananda story

Story – कहानी

Swami Vivekananda story
Swami Vivekananda story

जब तक आप खुद पे विश्वास नहीं करते

तब तक आप भगवान पर भी विश्वास नहीं कर सकते है !

यह कहना था। भारत के महान धर्म गुरु गुरु स्वामी विवेकानंद जी का जो कि एक विदवान सन्यासी युवा के तौर पर सामने आये। यह भारत में ही नही बल्कि पूरी दुनिया में अपनी पावरफुल स्पीच के जरिये भारतीय संस्कृति कि खुशबू फैला दी !

स्वामी विवेकानंद जी का मानना था ! ” कि अपने गोल को पाने के लिए तब तक कोशिश करना चाहिए। जब तक कि वह गोल हासिल न हो जाये। क्युकी जितना बड़ा संघर्ष होगा जीत उतनी ही शानदार होगी। “ और विवेकानंद जी के विचार इतने प्रभावित करने वाले थे कि बडे – बड़े विदवान भी इनके विचारे से प्रभवित हो जाते थे ! आज के इस पोस्ट में मै स्वामी विवेकानंद जी के जीवन से संबधित कुछ कहानी आपके साथ शेयर करुगा।

Fast story Focusing on the goal ( पहली कहानी लक्ष्य पर ध्यान केंद्रित करना )

एक बार स्वामी विवेकानंद जी अपन आश्रम में सो रहे थे। कि तभी एक व्यक्ति उनके पास आया जो कि बहुत दुखी था ! और आते ही स्वामी विवेकानंद जी के चरणों में गिर पड़ा और बोला महाराज मै अपने जीवन में खूब मेहनत करता हु हर काम खूब मन लगाकर भी करता हु फिर भी आजतक मै कभी सफल व्यक्ति नहीं बन पाया।

उस व्यक्ति कि बाते सुनकर स्वामी विवेकानंद ने कहा ठीक है। आप मेरे इस पालतू कुत्ते को थोड़ा देर तक घुमाकर लाये तबतक आपके समस्या का समाधान ढूढता हु इतना कहने के बाद वह व्यक्ति कुत्ते को घुमाने के लिए चल गया। और फिर कुछ समय बीतने के बाद वह व्यक्ति वापस आया। तो स्वामी विवेकानंद ने उस व्यक्ति से पूछ की यह कुत्ता इतना हाफ क्यों रहा है। जबकि तुम थोड़े से थके हुए नहीं लग रहे हो आखिर ऐसा क्या हुआ.

इसपर उस व्यक्ति ने कहा की मै तो सीधा अपने रास्ते पर चल रहा था जबकि यह कुत्ता इधर उधर रास्ते भर भागता रहा और कुछ भी देखता तो उधर ही दौड़ जाता था. जिसके कारण यह इतना थक गया है !

इसपर स्वामी विवेकानंद जी मुस्कुराते हुए कहा बस यही तुम्हारे प्रश्नों का जवाब है. तुम्हारी सफलता की मंजिल तो तुम्हारे सामने ही होती है. लेकिन तुम अपने मंजिल के बजाय इधर उधर भागते हो जिससे तुम अपने जीवन में कभी सफल नही हो पाए. यह बात सुनकर उस व्यक्ति को समझ में आ गया था। की यदि सफल होना है तो हमे अपने मंजिल पर ध्यान देना चाहिए।

Moral of the story कहानी से शिक्षा

स्वामी विवेकानंद जी के इस कहानी से हमें यही शिक्षा मिलती है. की हमें जो करना है। जो कुछ भी बनना है। हम उस पर ध्यान नहीं देते है , और दुसरो को देखकर वैसा ही हम करने लगते है। जिसके कारण हम अपने सफलता के मंजिल के पास होते हुए दूर भटक जाते है। इसीलिए अगर जीवन में सफल होना है ! तो हमेशा हमें अपने लक्ष्य पर ध्यान केंद्र्ति करना चाहिए !

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Second story Respect of women ( दूसरी कहानी – नारी का सम्मान )

स्वामी विवेकानंद जी के बारे में देश – विदेश में फैली हुई थी। एक बार कि बात है। विवेकानंद जी समोहर के लिए विदेश गए थे। और उनके समोहर में बहुत से विदेशी लोग आये हुए थे ! उनके दवार दिए गए स्पीच से एक विदेशी महिला बहुत ही प्रभावित हुई और वह विवेकानंद जी के पास आयी और स्वामी विवेकानंद से बोली कि में आपसे शादी करना चाहती हु ताकि आपके जैसा ही मुझे गैरवशाली पुत्र कि प्राप्ति हो।

इसपर स्वामी विवेकानंद जी बोले कि क्या आप जानती है। कि ” मै एक सन्यासी हु ” भला मै कैसे शादी कर सकता हु अगर आप चाहो तो मुझे आप अपना पुत्र बना लो। इससे मेरा सन्यास भी नही टूटेगा और आपको मेरे जैसा पुत्र भी मिल जाएगा। यह बात सुनते ही वह विदेशी महिला स्वामी विवेकानंद जी के चरणों में गिर पड़ी और बोली कि आप धन्य है। आप ईश्वर के समान है ! जो किसी भी परिस्थिति में भी आप अपने धर्म के मार्ग से विचलित नहीं होते है।

moral of the story कहानी से शिक्षा

स्वामी विवेकानंद के इस कहानी से हमें यही शिक्षा मिलती है ! कि सच्चा पुरष वही होता है। कि जो हर परिस्थिति में भी नारी का सम्मान करे

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Swami vivekananda quotes ( स्वामी विवेकानंद जी के विचार )

  • संस्कृति वस्त्रों में नहीं, चरित्र के विकास में है।

एक बार जब स्वामी विवेकानन्द जी विदेश गए तो उनका भगवा वस्त्र और पगड़ी देख कर लोगों ने पूछा, – आपका बाकी सामान कहाँ है ?
स्वामी जी बोल ‘बस यही सामान है’

तो कुछ लोगों ने ब्यंग्य किया कि ‘अरे! यह कैसी संस्कृति है आपकी ? तन पर केवल एक भगवा चादर लपेट रखी है ! कोट – पतलून जैसा कुछ भी पहनावा नहीं है ?

इस पर स्वामी विवेकानंद जी मुस्कुराए और बोले, – ‘हमारी संस्कृति आपकी संस्कृति से भिन्न है…. आपकी संस्कृति का निर्माण आपके दर्जी करते हैं जबकि हमारी संस्कृति का निर्माण हमारा चरित्र करता है.

– संस्कृति वस्त्रों में नहीं, चरित्र के विकास में है.

  • माँ से बढ़कर कोई नहीं.

विवेकानंद जी से एक जिज्ञासु ने प्रश्न किया, मां की महिमा संसार में किस कारण से गाई जाती है? स्वामी जी मुस्कराए, उस व्यक्ति से बोले, पांच सेर वजन का एक पत्थर ले आओ। जब व्यक्ति पत्थर ले आया तो स्वामी जी ने उससे कहा, अब इस पत्थर को किसी कपड़े में लपेटकर अपने पेट पर बाँध लो और चौबीस घंटे बाद मेरे पास आओ तो मैं तुम्हारे प्रश्न का उत्तर दूंगा.

स्वामी जी के आदेशानुसार उस व्यक्ति ने पत्थर को अपने पेट पर बांध लिया और चला गया। पत्थर बंधे हुए दिनभर वो अपना कम करता रहा, किन्तु हर छण उसे परेशानी और थकान महसूस हुई। शाम होते-होते पत्थर का बोझ संभाले हुए चलना फिरना उसके लिए असह्य हो उठा। थका मांदा वह स्वामी जी के पास पंहुचा और बोला मैं इस पत्थर को अब और अधिक देर तक बांधे नहीं रख सकूंगा.

एक प्रश्न का उत्तर पाने क लिए मै इतनी कड़ी सजा नहीं भुगत सकता स्वामी जी मुस्कुराते हुए बोले, पेट पर इस पत्थर का बोझ तुमसे कुछ घंटे भी नहीं उठाया गया। मां अपने गर्भ में पलने वाले शिशु को पूरे नौ माह तक ढ़ोती है और ग्रहस्थी का सारा काम करती है। संसार में मां के सिवा कोई इतना धैर्यवान और सहनशील नहीं है। इसलिए

माँ से बढ़ कर इस संसार में कोई और नहीं.

  • डर का सामना

एक बार बनारस में स्वामी जी दुर्गा जी के मंदिर से निकल रहे थे कि तभी वहां मौजूद बहुत सारे बंदरों ने उन्हें घेर लिया. वे उनके नज़दीक आने लगे और डराने लगे . स्वामी जी भयभीत हो गए और खुद को बचाने के लिए दौड़ कर भागने लगे, पर बन्दर तो मानो पीछे ही पड़ गए और वे उन्हें दौडाने लगे.

पास खड़ा एक वृद्ध सन्यासी ये सब देख रहा था , उसने स्वामी जी को रोका और बोला , –  रुको ! उनका सामना करो ! स्वामी जी तुरन्त पलटे और बंदरों के तरफ बढ़ने लगे , – ऐसा करते ही सभी बन्दर भाग गए. इस घटना से स्वामी जी को एक गंभीर सीख मिली और कई सालों बाद उन्होंने एक संबोधन में कहा भी – 

यदि तुम कभी किसी चीज से भयभीत हो, तो उससे भागो मत , पलटो और सामना करो.

बुक्स –

स्वामी विवेकानंद जी ने बहुत से किताबे लिखी है ! जिसमे कुछ किताबे बहुत ही प्रसिद्ध हुए थे। आप से पढ़ सकते है. Thoughts to Inspire: Swami Vivekanand की यह किताब काफी प्रचलित हुई थी !

यह किताब काफी प्रचलित हुई थी !

  • विवेकानंद की आत्मकथा
  • स्वामी विवेकानंद जीवन और विचार
  • कर्मयोग
  • थॉट्स टो इनसपिरे स्वामी विवेकानंद

इसे भी पढ़े –

बायोग्राफी

बुक समरी

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2 Responses

  1. seema says:

    bahut hi acchi story thi
    thanku sir

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